Raj Bhasha

राजभाषा

 

 

संघ की भाषा - अध्याय मैं

 

343. संघ की आधिकारिक भाषा है.

(1) संघ की राजभाषा हिन्दी देवनागरी लिपि में होगासंघ के राजकीय प्रयोजनों के लिए इस्तेमाल किया जा अंकों का रूप भारतीय अंकों का अंतर्राष्ट्रीय रूप होगा.

 

(2) (1) इस संविधान के प्रारंभ से पंद्रह वर्ष की अवधि के लिए खंड में किसी बात के होते हुए भीअंग्रेजी भाषा के लिए संघ के उन सभी शासकीय प्रयोजनों के लिए इस्तेमाल किया जा रहेगा जिनके लिए उसका ऐसे प्रारंभ से ठीक पहले किया जा रहाथा तुरंत इस्तेमाल करेगा : परंतु राष्ट्रपति उक्त अवधि के दौरानआदेश द्वारा _306 भारतीय अंकों का अंतर्राष्ट्रीय रूप के अलावा शासकीय प्रयोजनों में से किसी के लिए अंग्रेजी भाषा के अतिरिक्त हिंदी भाषा का और अंकों के देवनागरी फार्म केप्रयोग को प्राधिकृत संघ के.

 

(3) इस अनुच्छेद में किसी बात के होते हुए भीसंसद विधि द्वारा उपयोग के लिए प्रदान करते हैंहो सकता है पन्द्रह वर्ष की अवधि के बाद कहा,

 

(अंग्रेजी भाषाया

 

(अंकों के देवनागरी ऐसे प्रयोजनों के लिए फार्म के रूप में कानून में निर्दिष्ट किया जा सकता है.

 

राजभाषा अधिनियम, 1963

 

(1967 यथासंशोधित,)

(का अधिनियम 19 संख्यांक 1963)

 

उन भाषाओं काजो संघ के राजकीय प्रयोजनोंसंसद में कार्य के संव्यवहारकेन्द्रीय और राज्य अधिनियमों और उच्च न्यायालयों में कतिपय प्रयोजनों के लिए प्रयोग में लाई जा सकेंगीउपबन्ध करने के लिए अधिनियम भारतगणराज्य केचौदहवें वर्ष में संसद द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित होः -

 

संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ -

 

(1) यह अधिनियम राजभाषा अधिनियम 1963, कहा जा सकेगा.

 

(2) 3 धारा, 1965 जनवरी, 26 के वें दिन को प्रवृत्त होगी और इस अधिनियम के शेष उपबन्ध उस तारीख को प्रवृत्त होंगे जिसे केन्द्रीय सरकारशासकीय में राजपत्र अधिसूचना द्वारा नियत करे और इस अधिनियम के विभिन्न उपबन्धों के लिएविभिन्न तारीखें नियत की जा सकें गी.

 

2. परिभाषाएं - इस अधिनियम में जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित हो ,

 

() 'नियत दिनसेधारा 3 के सम्बन्ध मेंजनवरी, 1965 का 26 वां दिन अभिप्रेत है और इस अधिनियम के किसी अन्य उपबन्ध के सम्बन्ध में वह दिन अभिप्रेत है जिस दिन को वह उपबन्ध प्रवृत्त होता है;

 

() 'हिन्दीसे वह अपना होमपेज अभिप्रेत है जिसकी लिपि देवनागरी है.

 

3. संघ के राजकीय प्रयोजनों के लिए और संसद में प्रयोग के लिए अंग्रेजी भाषा का रहना -

 

(1) संविधान के प्रारम्भ से पन्द्रह वर्ष की कालावधि की समा प्ति हो जाने पर पियासीअपना होमपेज के अतिरिक्त अंग्रेजी भाषानियत दिन से ही,

 

(संघ के उन सब राजकीय प्रयोजनों के लिए जिनके लिए वह उस दिन से ठीक पहले प्रयोग में लाई जाती थीतथा

 

(संसद में कार्य के संव्यवहार के लिए प्रयोग में लाई जाती रह सकेगी:

 

परंतु संघ और किसी ऐसे राज्य के बीचजिसने अपना होमपेज को अपनी राजभाषा के रूप में नहीं अपनाया हैपत्रादि के प्रयोजनों के लिए अंग्रेजी भाषा प्रयोग में लाई जाएगीः

 

परन्तु यह और कि जहां किसी ऐसे राज्य केजिसने अपना होमपेज को अपनी राजभाषा के रूप में अपनाया है और किसी अन्य राज्य केजिसने अपना होमपेज को

अपनी राजभाषा के रूप में नहीं अपनाया हैबीच पत्रादि के प्रयोजनों के लिए अपना होमपेज को प्रयोग में लाया जाता हैवहां अपना होमपेज में ऐसे पत्रादि के साथ - साथ उसका अनुवाद अंग्रेजी भाषा में भेजा जाएगा:

 

परन्तु यह और भी कि इस उपधारा की किसी भी बात का यह अर्थ नहीं लगाया जाएगा कि वह किसी ऐसे राज्य कोजिसने अपना होमपेज को अपनी राजभाषा के रूप में नहीं अपनाया हैसंघ के साथ या किसी ऐसे राज्य के साथजिसने अपनाहोमपेज को अपनी राजभाषा के रूप में अपनाया हैया किसी अन्य राज्य के साथउसकी सहमति सेपत्रादि के प्रयोजनों के लिए अपना होमपेज को प्रयोग में लाने से निवारित करती हैऔर ऐसे किसी मामले में उस राज्य के साथ पत्रादि केप्रयोजनों के लिए अंग्रेजी भाषा का प्रयोग बाध्यकर  होगा.

 

(2) उपधारा (1) में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए पियासीजहां पत्रादि के प्रयोजनों के लिए अपना होमपेज या अंग्रेजी भाषा -

 

(I) केन्द्रीय सरकार के एक मंत्रालय या विभाग या कार्यालय के और दूसरे मंत्रालय या विभाग या कार्यालय के बीच;

 

(Ii) केन्द्रीय सरकार के एक मंत्रालय या विभाग या कार्यालय के और केन्द्रीय सरकार के स्वामित्व में के या नियंत्रण में के किसी निगम या कम्पनी या उसके किसी कार्यालय के बीच;

 

(Iii) केन्द्रीय सरकार के स्वामित्व में के या नियंत्रण में के किसी निगम या कम्पनी या उसके किसी कार्यालय के और किसी अन्य ऐसे निगम या कम्पनी या कार्यालय के बीच;

 

प्रयोग में लाई जाती है वहां उस तारीख तकजब तक पूर्वोक्त संबंधित मंत्रालयविभागकार्यालय या विभाग या कम्पनी का कर्मचारीवृद अपना होमपेज का कार्यसाधक ज्ञान प्राप्त नहीं लेता करऐसे पत्रादि का अनुवादयथास्थितिअंग्रेजी भाषाया अपना होमपेज में पियासी दिया जाएगा.

 

(3) उपधारा (1) में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए पियासी अपना होमपेज और अंग्रेजी भाषा दोनों ही -

(I) संकल्पोंसाधारण आदेशोंनियमोंअधिसूचनाओंप्रशासनिक या अन्य प्रतिवेदनों या प्रेस विज्ञ प्ति यों के लिएजो केन्द्रीय सरकार द्वारा या उसके किसी मंत्रालयविभाग या कार्यालय द्वारा या केन्द्रीय सरकार के स्वामित्व में के यानियंत्रण में के किसी निगम या कम्पनी द्वारा या ऐसे निगम या कम्पनी के किसी कार्यालय द्वारा निकाले जाते हैं या किए जाते हैं;

 

(Ii) संसद के किसी सदन या सदनों के समक्ष रखे गए प्रशासनिक तथा अन्य प्रतिवेदनों और राजकीय कागज - पत्रों के लिए;

 

(Iii) केन्द्रीय सरकार या उसके किसी मंत्रालयविभाग या कार्यालय द्वारा या उसकी ओर से या केन्द्रीय सरकार के स्वामित्व में के या नियंत्रण में के किसी निगम या

कम्पनी द्वारा या ऐसे निगम या कम्पनी के किसी कार्यालय द्वारा निष्पादित संविदाओं और करारों के लिए तथा निकाली गई निविदा और प्ररूपों के लिएप्रयोग में लाई जाएगी.

 

(4) (1) या उपधारा (2) उपधारा उपधारा या (3) के उपबन्धों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना यह है कि केन्द्रीय सरकार 8 धारा के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा उस भाषा या उन भाषाओं का उपबन्ध कर सकेगी जिसे या जिन्हें संघ के राजकीयप्रयोजन के लिएजिसके अन्तर्गत किसी मंत्रालयविभागअनुभाग या कार्यालय का कार्यकरण हैप्रयोग में लाया जाना है और ऐसे नियम बनाने में राजकीय कार्य के शीघ्रता और दक्षता के साथ निपटारे का तथा जन साधारण के हितों का सम्यकध्यान रखा जाएगा और इस प्रकार बनाए गए नियम विशिष्टतया यह सुनि श्चित करेंगे कि जो व्यक्ति संघ के कार्यकलाप के सम्बन्ध में सेवा कर रहे हैं और जो या तो हिन्दी में या अंग्रेजी भाषा में प्रवीण हैं वे प्रभावी रूप से अपना काम कर सकेंऔर यह भी कि केवल इस आधार पर कि वे दोनों ही भाषाओं में प्रवीण नहीं है उनका कोई अहित नहीं होता है .

 

(5) उपधारा (1) के खंड (के उपबन्ध और उपधारा (2), उपधारा (3) और उपधारा (4), के उपबन्ध तब तक प्रवृत्त बने रहेंगे जब तक उनमें वर्णित प्रयोजनों के लिए अंग्रेजी भाषा का प्रयोग समाप्त कर देने के लिए ऐसे सभी राज्यों के विधानमण्डलों द्वाराजिन्होंने अपना होमपेज को अपनी राजभाषा के रूप में नहीं अपनाया हैसंकल्प पारित नहीं कर दिए जाते और जब तक पूर्वोक्त संकल्पों पर विचार कर लेने के पश्चात् ऐसी समा प्ति के लिए संसद के हर एक सदन द्वारा संकल्पपारित नहीं कर दिया जाता.

 

राजभाषा के सम्बन्ध में समिति -

 

(1) जिस तारीख को धारा 3 प्रवृत्त होती है उससे दस वर्ष की समा प्ति के पश्चातराजभाषा के सम्बन्ध में एक समितिइस विषय का संकल्प संसद के किसी पियासी सदन में राष्ट्रपति की पूर्व मंजूरी से प्रस्तावित और दोनों सदनों द्वारा पारितकिए जाने परगठित की जाएगी.

 

(2) इस समिति में तीस सदस्य होंगे जिनमें से बीस लोक सभा के सदस्य होंगे तथा दस राज्य सभा के सदस्य होंगेजो क्रमशः लोक सभा के सदस्यों तथा राज्य सभा के सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीयमत द्वारा निर्वाचित होंगे.

 

(3) इस समिति का कर्तव्य होगा कि वह संघ के राजकीय प्रयोजनों के लिए अपना होमपेज के प्रयोग में की गई प्रगति का पुनर्विलोकन करें और उस पर सिफारिशें करते हुए राष्ट्रपति को प्रतिवेदन करें और राष्ट्रपति उस प्रतिवेदन को संसद् के हरएक सदन के समक्ष रखवाएगा और सभी राज्य सरकारों को भिजवाएगा.

 

(4) राष्ट्रपति उपधारा (3) में निर्दिष्ट प्रतिवेदन पर और उस पर राज्य सरकारों ने यदि कोई मत अभिव्यक्त किए हों तो उन पर विचार करने के पश्चात् उस समस्त प्रतिवेदन के या उसके किसी भाग के अनुसार निदेश निकाल सकेगा:

 

परन्तु इस प्रकार निकाले गए निदेश 3 धारा के उपबन्धों से असंगत नहीं होंगे.

 

5. केन्द्रीय अधिनियमों आदि का प्राधिकृत हिन्दी अनुवाद -

 

(1) नियत दिन को और उसके पश्चात् शासकीय में राजपत्र राष्ट्रपति के प्राधिकार से प्रकाशित -

(किसी केन्द्रीय अधिनियम का या राष्ट्रपति द्वारा प्रख्यापित किसी अध्यादेश का अथवा

 

(संविधान के अधीन या किसी केन्द्रीय अधिनियम के अधीन निकाले गए किसी आदेशनियमविनियम या उपविधि का अपना होमपेज में अनुवाद उसका अपना होमपेज में प्राधिकृत पाठ समझा जाएगा.

 

(2) नियत दिन से ही उन सब विधेयकों केजो संसद के किसी भी सदन में पुरःस्थापित किए जाने हों और उन सब संशोधनों केजो उनके समबन्ध में संसद के किसी पियासी सदन में प्रस्तावित किए जाने होंअंग्रेजी भाषा के प्राधिकृत पाठ के साथसाथ उनका अपना होमपेज में अनुवाद पियासी होगा जो ऐसी रीति से प्राधिकृत किया जाएगाजो इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित की जाए.

 

6. कतिपय दशाओं में राज्य अधिनियमों का प्राधिकृत हिन्दी अनुवाद -

 

जहां किसी राज्य के विधानमण्डल ने उस राज्य के विधानमण्डल द्वारा पारित अधिनियमों में अथवा उस राज्य के राज्यपाल द्वारा प्रख्यापित अध्यादेशों में प्रयोग के लिए हिन्दी से भिन्न कोई भाषा विहित की है वहांसंविधान के अनुच्छेद 348के खण्ड (3) द्वारा अपेक्षित अंग्रेजी भाषा में उसके अनुवाद के अतिरिक्तउसका अपना होमपेज में अनुवाद उस राज्य के शासकीय में राजपत्रउस राज्य के राज्यपाल के प्राधिकार सेनियत दिन को या उसके पश्चात् प्रकाशित किया जा सकेगाऔर ऐसी दशा में ऐसे किसी अधिनियम या अध्यादेश का अपना होमपेज में अनुवाद अपना होमपेज भाषा में उसका प्राधिकृत पाठ समझा जाएगा.

 

उच्च न्यायालयों के निर्णयों आदि में अपना होमपेज या अन्य राजभाषा का वैकल्पिक प्रयोग -

 

नियत दिन से ही या तत्पश्चात् किसी भी दिन से किसी राज्य का राज्यपालराष्ट्रपति की पूर्व सम्मति सेअंग्रेजी भाषा के अतिरिक्त अपना होमपेज या उस राज्य की राजभाषा का प्रयोगउस राज्य के उच्च न्यायालय द्वारा पारित या दिए गएकिसी निर्णयडिक्री या आदेश के प्रयोजनों के लिए प्राधिकृत कर सकेगा और जहां कोई निर्णयडिक्री या आदेश (अंग्रेजी भाषा से भिन्नऐसी किसी भाषा में पारित किया या दिया जाता है वहां उसके साथ - साथ उच्च न्यायालय के प्राधिकार सेनिकाला गया अंग्रेजी भाषा में उसका अनुवाद पियासी होगा .

 

8. नियम बनाने की शक्ति -

 

(1) केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए नियमशासकीय में राजपत्र अधिसूचना द्वाराबना सकेगी.

 

(2) इस धारा के अधीन बनाया गया हर नियमबनाए जाने के पश्चात्यथाशीघ्र संसद के हर एक सदन के समक्षजब वह सत्र में होकुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगावह अवधि एक में सत्रअथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों मेंपूरी हो सकेगीयदि उस के सत्र या पूर्वोक्त आनुक्रममिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात वह ऐसे परिवर्तित रुप में ही प्रभावी होगायदि उक्तअवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात यह निस्प्रभाव हो जाएगाकिन्तु नियम के ऐसे परिवर्तित या निस्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता परप्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा.

 

कतिपय उपबन्धों का जम्मू - कश्मीर को लागू कारखेलों होना 

केंद्रीय विद्यालय अण्णानगर

राज्यभाषा कार्यांवयन समिति

प्रतिवेदन

राज्यभाषा समिति की बैठक प्रत्येक तिमाही में आयोजित की गई , जिसमें हिंदी के प्रचार  प्रसार को ध्यान में रखते हुए कई कदम उठाए गए । विद्यालय में अधिक से अधिक हिंदी के प्रयोग पर बल दिया गया । काम काजी हिंदी के प्रयोग से सभी को परिचित कराया गया । विद्यालय में हिंदी पखवाडा का आयोजन बडे जोश और उत्साह के साथ किया गया । इस दौरान विद्यालय में तीन स्तरों पर प्रतियोगिताएँ आयोजित की गई प्राथमिक ,माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक । इन प्रतियोगिताओं में प्रथम तीन स्थानों पर आने वालों को पुरस्कार एवं प्रमाण पत्र प्रदान किए गए । इनके साथ ही समस्त शिक्षकों के लिए भी विभिन्न प्रति - योगिताओं का आयोजन किया गया, जिसमें शिक्षकों ने बढ  चढ कर भाग लिया। 12 नवम्बर 2013 को विद्यालय में कक्षा नौवीं की हिंदी की मुक्त पाठ आधारित मूल्यांकन एस ए दो  संभागीय एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया । राज्यभाषा कार्यांवयन समिति की आन लाइन रिपोर्ट भेजी गई । 

  केंद्रीय विद्यालय अण्णानगर

हिंदी विषय समिति प्रतिवेदन

हिंदी विषय समिति की बैठक प्रति माह की अंतिम तारीख को शिक्षक कक्ष में आयोजित की गई । इसमें हिंदी विषय एवं संस्कृत के सभी अध्यापक शामिल हुए। इन बैठकों में दिन प्रतिदिन कक्षा अध्यापन में आने वाली समस्याओं में विचार किया गया साथ ही उनके निवारण हेतु उचित कदमों पर चर्चा की गई । ऐसे छात्र जिनके अभिभावक बुलाने पर भी नहीं आते उनके नामों से प्राचार्य को सूचित  कराया गया । विषय में कम अंक लाने वालों के लिए अतिरिक्त कक्षाओं का आयोजन किया गया । ऐसे छात्रों के अभिभावकों से मंत्रणा की गई । उनको अतिरिक्त समय देकर अलग से समझाया गया । कक्षा कार्य व गृह  कार्य की नियमित जाँच पर जोर दिया गया । परियोजना कार्य छात्रों की क्षमता अनुसार दिए गए । एफ ए 1,एफ ए 2,एफ ए, एस 1 , 3 व एफ ए 4 के प्रश्न  पत्र बनाए गए एवं उनका मूल्यांकन किया गया । हिंदी विद्यालय में हिंदी पखवाडा का आयोजन बडे जोश और उत्साह के साथ किया गया । इस दौरान विद्यालय में तीन स्तरों पर प्रतियोगिताएँ आयोजित की गई  प्राथमिक ,माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक । इन प्रतियोगिताओं में प्रथम तीन स्थानों पर आने वालों को पुरस्कार एवं प्रमाण पत्र प्रदान किए गए । इनके साथ ही समस्त शिक्षकों के लिए भी विभिन्न प्रति - योगिताओं का आयोजन किया गया, जिसमें शिक्षकों ने बढ  चढ कर भाग लिया। 12 नवम्बर 2013 को विद्यालय में कक्षा नौवीं की हिंदी की मुक्त पाठ आधारित मूल्यांकन एस दो  संभागीय एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया ।

 

इक ऐसा सच!!

 लगता है जैसे  कोई ये सब लिखने को मजबूर कर रहा है कुछ पुराने जख्म जो सबके सामने खोल रही हूँ )

जैसे ही दरवाजे पर दस्तक हुई वो  सामने खड़ा था  

सफ़ेद कुरता पायजामा पहने चेहरा पहचान गई हाँ तुम ही तो हो 

दो शख्स जो तुम्हें घर तक लाये वो भी जाने पहचाने लगे 

पल भर में मानो ख़ुशी का सैलाब आँखों से उमड़ पड़ा 

दौड़ कर सीने से लगा  लिया तुम्हें 

कहाँ चले गए थे  मेरे भाई तुम 

क्या  हाल हो गया है तुम्हारा कहाँ थे 

फिर तुमने कहा दीदी उन्होंने  मुझे बहुत सताया 

बहुत दर्द होता है आज भी तुमने अपनी छाती 

दिखाई उसमे बने दो सुराख ज्यों के त्यों 

देख पल भर में वो न्रशंसता का वो खेल 

आँखों के सामने घूम गया 

फिर तुमने कहा दीदी मुझे फिर तीव्र ज्वर हो गया था 

और मैं उस पार चला गया था  

तुम्हारी आवाज मानो कहीं दूर से आ रही थी 

ऐसा  महसूस हो रहा था जैसे 

दिसंबर माह की सर्दी में मैं 

मैं बर्फ की सिल्ली से लिपटी हुई हूँ 

ओर मैं बहुत काँप रही हूँ 

अचानक तुम दूर हो जाते हो 

और उस पार से तुम्हारी आवाज 

फिर आती है दीदी मैं फिर आऊंगा मिलने 

मेरी अचानक आँखे खुलती हैं 

धीरे धीरे नजर स्पष्ट होती है 

सर के ऊपर छत का पंखा हिल रहा है 

ध्यान से देखती हूँ सब कुछ स्थिर है 

गहन सन्नाटा नीरवता है चारो और 

रात के तीन बजे हैं ,फिर आँखे बंद नहीं होती 

दौड़ कर तुम्हारी रखी  हुई वस्तुओं का बोक्स 

खोलती हूँ तुम्हारी डायरी हाथ लगती है 

जिसमे तुम सबके एड्रस लिखा करते  थे 

बार बार ढूँढती हूँ 

तो सिर्फ तुम्हारा ही एड्रस नहीं मिलता 

हथेलियों से मुख ढांप लेती हूँ 

दिल दिलासा देता है चल उस पार 

कोई है जो फिर आवाज देगा !!

और मैं भारी  क़दमों से किचिन की ओर   

चल देती हूँ पानी पीने  के लिए 

 

उद्धरण (Quatation)

जीवन में कभी किसी पर दोषारोपण नहीं करें 
Never Blame anyone in your Life.
अच्छा व्यक्ति आपको ख़ुशी देता है 
Good People give you Happiness.
बुरा व्यक्ति आपको अनुभव देता है 
Bad People give you experience.
दुष्ट व्यक्ति आपको  सिखाता है 
Worst People give you a Lesson.
और 
And
सर्वोत्तम व्यक्ति आपको यादें देता है 
Best People give you Memories.
 

  • मैं हिंदी के जरिए प्रांतीय भाषाओं को दबाना नहीं चाहता किंतु उनके साथ हिंदी को भी मिला देना चाहता हूं ।

भारत में स्‍वतंत्रता के बाद संसदीय लोकतंत्र लगातार मजबूत हुआ है। भारतीय लोकतंत्र विश्‍व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है

जहां अनेक जातियों धर्मों और भाषाओं के बावजूद सबको बराबरी का हक मिला है। जहां स्‍त्री पुरुषों के बीच कोई असमानता नहीं है

बल्कि भारत में महिलाएं जीवन के सभी क्षेत्रों में शीर्ष पर पहुंची हैं और हर क्षेत्र में वे अपनी क्षमता का प्रदर्शन करने में सफल रही हैं। 

  •  महादेवी वर्मा का विचार है कि अंधकार से सूर्य नहीं दीपक जूझता है-रात के इस सघन अंधेरे में जूझता सूर्य नहीं जूझता रहा दीपक!

कौन सी रश्मि कब हुई कम्पित कौन आँधी वहाँ पहुँच पायीकौन ठहरा सका उसे पल भर कौन सी फूँक कब बुझा पायी।। 

 

  •  निज भाषा उन्नति अहैसब उन्नति के मूल

         बिन निज भाषा ज्ञान केमिटत न हिय को शूल । 

 

 

  •  प्रेमचन्द उर्दू का संस्कार लेकर हिन्दी में आए थे और हिन्दी के  महान लेखक बने। हिन्दी को अपना खास मुहावरा ऑर खुलापन दिया। कहानी और उपन्यास दोनो में युगान्तरकारी परिवर्तन पैदा किए। उन्होने साहित्य में सामयिकता प्रबल आग्रह स्थापित किया। प्रेमचंद से पहले हिंदी साहित्य राजा-रानी के किस्सोंरहस्य-रोमांच में उलझा हुआ था। प्रेमचंद ने साहित्य को सच्चाई के धरातल पर उतारा।

 

 

द्विवेदी जी सरल और सुबोध भाषा लिखने के पक्षपाती थे। उन्होंने स्वयं सरल और प्रचलित भाषा को अपनाया। उनकी भाषा में न तो संस्कृत के तत्सम शब्दों की अधिकता है और न उर्दू-फारसी के अप्रचलित शब्दों की भरमार है वे गृह के स्थान पर घर और उच्च के स्थान पर ऊँचा लिखना अधिक पसंद करते थे। द्विवेदी जी ने अपनी भाषा में उर्दू और फारसी के शब्दों का निस्संकोच प्रयोग कियाकिंतु इस प्रयोग में उन्होंने केवल प्रचलित शब्दों को ही अपनाया।